Indian Railways: रेलवे ने तैयार किया नया प्लान, अब वेटिंग लिस्ट की समस्या होगी खत्म, जानिए पूरी डिटेल

Indian Railways: इंडियन रेलवे का नेटवर्क जितना विशाल है, उससे यात्रा करने वाले लोगों की संख्या भी उतनी ही अधिक है। ऐसे में लंबी दूरी की यात्रा करने वालों के लिए टिकट आरक्षित करवाना आवश्यक हो जाता है। लेकिन यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण टिकट कन्फर्म होना आसान नहीं होता और कभी कभी तो इसमें बहुत प्रतीक्षा के बाद भी टिकट कन्फर्म नहीं हो पाती। इसके अलावा रेलवे के जरिए माल ढुलाई का काम भी बहुत बड़े पैमाने पर होता है।

आज के आलेख में हम आपको वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा देश में तीन बड़े व महत्वाकांक्षी आर्थिक रेलवे कॉरिडोर के निर्माण की घोषणा से संबंधित जानकारी से अवगत कराएंगे।

   

वित्त मंत्री ने की बड़ी घोषणा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024 का बजट पेश करते हुए देश में तीन बड़े आर्थिक रेलवे कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। इस प्रोजेक्ट के साथ 434 प्रोजेक्ट जुड़े हुए हैं जो कि देश में रेल यात्रा और माल धुलाई की दिशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। आपको बता दें कि 6 से 8 साल में पूरे होने वाले इन रेलवे कॉरिडोर की लंबाई लगभग 40,000 किलोमीटर तक होगी।

रेल मंत्री ने दिया विस्तृत स्पष्टीकरण

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन तीनों कॉरिडोर के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि यह डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नहीं है। इससे फ्रेट और पैसेंजर दोनों को ही बहुत अधिक फायदा होने वाला है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सही मायने में देखा जाए तो रेलवे की यह घोषणा विकसित भारत का एक नया ब्लूप्रिंट है। सन् 2030 से 31 तक यह देश में रेल ट्रांसपोर्ट का रूप बदलकर रख देगा। साथ ही उन्होंने बताया कि 40000 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक बिछाने के लिए आरंभिक लागत 11 लाख करोड़ रुपए तक अनुमानित है और यह लागत बेहद शुरुआती होगी क्योंकि अभी इन तीनों प्रोजेक्ट के लिए डीपीआर तैयार करना शेष है।

2030 तक होगा वेटिंग लिस्ट का झंझट खत्म

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के बाद देश में रेल हर उस मुकाम तक पहुंचेगी जहां पर पहुंचना कठिन था और एक बेहतर स्पीड के साथ माल ढुलाई भी की जा सकेगी। इन तीनों कॉरिडोर में से पहले का नाम एनर्जी मिनरल और सीमेंट कॉरिडोर, दूसरे का पार्ट कनेक्टिविटी कॉरिडोर और तीसरे का नाम हाई स्पीड डेंसिटी कॉरिडोर दिया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि 2030 से 31 तक देश में रेल टिकट बुक करने वाले किसी भी यात्री को वेटिंग लिस्ट के झंझट से नहीं गुजरना पड़ेगा।

जानिए कैसे होगी भारतीय रेल तैयार

इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य केवल माल ढुलाई को विस्तार देना व यात्रियों के लिए रेलवे ट्रैक बनाने तक ही सीमित नहीं है बल्कि जहां-जहां डबल लाइन है वहां वहां उन्हें बढ़ाकर 4 लेन करना होगा व फोर लाइन को जरूरत के मुताबिक और भी बढ़ना होगा। साथ ही डिमांड के हिसाब से यात्रियों के लिए ट्रेनों की संख्या भी बढ़ानी होगी।

रेलवे अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस कॉरिडोर के बनने के बाद और नई ट्रेनों के आने के बाद सालाना 700 करोड़ यात्रियों को सफलता पूर्वक यात्रा करवाने वाली रेलवे अब 1000 करोड़ यात्रियों को यात्रा कराने में पूरी तरह से सक्षम हो जाएगी।

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