Land Purchase Rules: भारत के इन 5 राज्यों में चाहकर भी कोई नहीं खरीद सकता है जमीन, वजह जानकर उड़ जाएंगे होश

Land Purchase Rules: जमीन खरीदना और नई जमीन पर अपने मनमाफिक घर बनना हम सभी चाहते हैं। सभी चाहते हैं की खूबसूरत स्थान पर उनकी अपनी जमीन और अपना घर हो। कई लोगों का ये भी सपना होता है कि वह हिल स्टेशन में अपना एक घर खरीदें तथा छुट्टियों में वहां पर शांति और सुकून के लिए जा सकें। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के कुछ राज्यों में उस राज्य के बाहर का कोई भी व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता।

एक सुंदर जगह पर घर बनाने का सपना हमेशा पूरा क्यों नहीं होता, अपने पसंदीदा हिल स्टेशन में हम किन नियमों और कानूनों के चलते घर नहीं ले सकते और किसी तरह ये संभव भी हो पाए तो उसके लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ सकती है, इसी विषय पर हमारा आज का आर्टिकल केन्द्रित हैं। हमारे आलेख पर अंत तक बने रहकर ये जानिए कि वो कौन से राज्य हैं जहां के नियमों के चलते हम वहां पर घर या जमीन नहीं खरीद सकते।

   

मेघालय से लेकर हिमाचल तक के राज्यों में मुश्किल है आवास बनाना

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में मेघालय से लेकर हिमाचल प्रदेश तक के राज्यों में आप ज़मीन या घर खरीदना चाहते हैं तो वहां की सरकार के द्वारा अपने राज्यों लिए कुछ अलग नियम और कानून बनाए गए हैं जिनका पालन करने के बाद ही आप वहां पर घर या संपत्ति खरीद सकते हैं। राज्य सरकार द्वारा केवल संपत्ति खरीदने पर प्रतिबंध के साथ ही ये भी नियम है कि यहां के लोग दूसरे राज्य के व्यक्तियों को अपना घर या संपत्ति बेच भी नहीं सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश में ले सकते हैं जमीन या नहीं?

यदि आप हिमाचल के बाहर के निवासी हैं और यहां पर जमीन खरीदना चाहते हैं तो आपको इसके लिए सबसे पहले राज्य सरकार की इजाजत लेनी पड़ेगी। आप यहां पर केवल गैर कृषि भूमि ही खरीद सकते हैं। इसके साथ-साथ हिमाचल प्रदेश टेनेसी और लैंड रिफॉर्म रूल्स 1975 के सेक्शन 38A (3) के तहत आपको राज्य सरकार को यह भी बताना होगा कि आप यहां पर ज़मीन क्यों खरीदना चाहते हैं। आपका कारण जानने के बाद राज्य सरकार उस पर विचार करने के उपरांत आपको 500 वर्ग मीटर तक जमीन खरीदने की अनुमति दे सकती है। इस राज्य में गैर हिमाचली व्यक्ति किसी भी प्रकार की कृषि भूमि नहीं खरीद सकता है और न ही यहां पर किसी प्रकार का कोई कृषि कार्य कर सकता है।

जाने कैसे खरीद सकते हैं नॉर्थ ईस्ट राज्यों में दूसरे राज्य के लोग प्रॉपर्टी

नॉर्थ ईस्ट के कई राज्य जैसे अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम, मेघालय, सिक्किम और मणिपुर कुछ ऐसे राज्य हैं जहां बाहरी लोग जमीन नहीं खरीद सकते। साथ ही यहां के निवासी भी दूसरे राज्य में जमीन नहीं खरीद सकते।

नागालैंड के नियम

नागालैंड राज्य में भी कश्मीर जैसा प्रावधान लागू है। 1963 में राज्य बनने के साथ ही विशेष अधिकार के रूप में आर्टिकल 371 ए के तहत यह प्रावधान मिला था। इसमें राज्य के कई ऐसे मामले हैं जिसमें दखल नहीं दिया जा सकता।

सिक्किम में भी नहीं खरीद सकते आप प्रॉपर्टी

सिक्किम राज्य में केवल वहां के निवासी ही जमीन खरीद सकते हैं। संविधान के अनुच्छेद 371 ए एफ के तहत जो सिक्किम को विशेष प्रावधान प्रदान करता है, उसके अनुसार बाहरी लोगों को भूमि या संपत्ति बिक्री और खरीद का कोई अधिकार नहीं है। इस राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में केवल आदिवासी ही भूमि और संपत्ति खरीद सकते हैं।

अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल प्रदेश भारत के मशहूर पर्यटन स्थलों में से एक है। आपको इस राज्य में भी प्रॉपर्टी खरीदने की अनुमति नहीं है। इस राज्य में कृषि भूमि को सरकारी अप्रूवल के बाद ही ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके अलावा मिजोरम, मेघालय, जम्मू कश्मीर और मणिपुर भी भारत के कुछ ऐसे राज्य हैं जहां पर प्रॉपर्टी खरीदने वह बेचने के कई नियम और कानून हैं। नॉर्थ ईस्ट के निवासी भी एक दूसरे के राज्य में जमीन व संपत्ति खरीद या बेच नहीं सकते।

मणिपुर में भी नहीं खरीद सकते प्रॉपर्टी

मणिपुर भारत का एक खूबसूरत राज्य है। यहां पर हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आते हैं। लेकिन यदि यहां की खूबसूरती को देखकर किसी का यहां पर जमीन या घर खरीदने का मन करे तो वह चाह कर भी यहां पर जमीन नहीं खरीद सकता। मणिपुर में दूसरे राज्य के लोग जमीन या घर नहीं खरीद सकते। यहां पर बाहरी लोगों के जमीन खरीदने पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया हुआ है। अनुच्छेद 371 बी के तहत इस राज्य में केवल वही लोग जमीन खरीद सकते जो यहां के मूल निवासी हैं।

इन स्थानों पर जमीन खरीदने से पहले इन बातों का ध्यान रखना है जरूरी

जमीन के टाइटल की जांच

जमीन खरीदते वक्त उसके टाइटल की जांच अति आवश्यक है। जमीन खरीदते वक्त आपको इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि जो आपको जमीन बेच रहा है वह उस संपत्ति का असली मालिक है या नहीं तथा उसके पास ही सारे अधिकार हैं या नहीं। आपको जमीन के सभी दस्तावेज अच्छे से जांच कर लेने चाहिए। यदि आप इन दस्तावेजों की जांच किसी वकील या एडवोकेट से करवाते हैं तो यह और भी बेहतर होगा ताकि सेल्स डीड और प्रॉपर्टी टैक्स की रसीदों की जांच करवाकर वेंडर से टाइटल कंफर्म होने का सर्टिफिकेट हासिल किया जा सके।

पब्लिक नोटिस जारी करें

कोई भी प्रॉपर्टी या जमीन खरीदने से पहले वहां के स्थानीय अखबारों में खरीदी जाने वाली भूमि या संपत्ति को आमंत्रित करने के लिए पब्लिक नोटिस देना चाहिए। जिससे आपको यह पता चल सकता है कि वह जमीन किसी थर्ड पार्टी की तो नहीं है।

पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी

जमीन व संपत्ति के मालिक की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी भी बेची जाती है। इस विषय में आपको इसकी अच्छी तरह से जांच कर लेनी चाहिए जिससे आपको यह पता चले कि जो प्रॉपर्टी बेची जा रही है वह उचित है या नहीं। कई बार सीमित समय के भीतर कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना जरूरी होता है जिसमें देरी के कारण आपकी लागत बढ़ सकती है। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए अपनी ओर से किसी को हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत कर लेना चाहिए।

दस्तावेजों का वेरिफिकेशन

संपत्ति या घर लेते समय उससे जुड़े सभी दस्तावेज और टाइटल सही है या नहीं, इसकी जांच कर लेना आवश्यक है। ऐसा करने से आपको पता चलेगा कि आपको ओरिजिनल दस्तावेज ही दिखाई जा रहे हैं या वह किसी थर्ड पार्टी से तो नहीं बनवाए गए। सौदा पूरा होने के बाद दूसरी पार्टी से उन ओरिजिनल दस्तावेजों को जरूर ले लें।

चैनल डॉक्यूमेंट

संपत्ति की लेनदेन में चैनल डॉक्यूमेंट को चेक कर लेना अति आवश्यक है। चैनल डॉक्यूमेंट का मतलब होता है कि यह जमीन किसने किसको बेची है। इस दौरान जो भी डील होती है, उसमें मौजूद लोगों के नाम मेंशन होते हैं। इस डॉक्यूमेंट में जमीन किसको कहां से मिली, इन सब की पूरी जानकारी होती है।

एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट

इस सर्टिफिकेट से आपको पता चलता है कि जो संपत्ति आप खरीद रहे हैं, उस पर कोई मॉर्टगेज, बैंक लोन या टैक्स तो बकाया नहीं है। इसके अलावा आपको यह भी पता चलता है कि इस पर कोई पेनाल्टी तो नहीं है। आप रजिस्ट्रार ऑफिस में फॉर्म नंबर 22 भरकर इस प्रकार की सारी जानकारी जुटा सकते हैं।

ऑक्यूपॅन्सइ सर्टिफिकेट

संपत्ति बेचते व खरीदते समय यह एक बेहद जरूरी दस्तावेज होता है जिसे हमें बिल्डर से अवश्य ले लेना चाहिए l यदि वह हमें इस दस्तावेज को प्रदान नहीं करता है तो हमें डेवलपर के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए।

पजेशन लेटर

डेवलपर खरीददार के लिए पजेशन लेटर जारी करता है जो उसके हक में होता है। इसमें प्रॉपर्टी पर कब्जे की तारीख लिखी होती है। होम लोन पाने के लिए इस दस्तावेज की असली कॉपी दिखाना अत्यंत आवश्यक होता है। जब तक यह हासिल नहीं होता तब तक पजेशन लेटर अकेले प्रॉपर्टी पर कब्जे के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

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