Supreme Court ने सुनाया बड़ा फैसला, पति की संपत्ति नहीं है पत्नी

आप सभी के जानकारी के लिए हम बता दे की वर्ष 2015 में एक महिला ने गोरखपुर कोर्ट में याचिका दायर कर पति से गुजारा भत्ता की मांग की थी। जिससे देखते हुए Court ने पति को ₹20000 प्रति महीना पत्नी को देने का फेशला सुना दिया। जिसके  बाद ही पति Court में  दंपतिक अधिकारों की बहाली के लिए अपनी यह याचिता दायर किया। 

Supreme Court ने एक मामले की सुनवाई के पश्चात कहां की पत्नी अपने पति की गुलाम या विरासत नहीं होती है।जिसे पति के साथ जबरदस्ती रहने का आदेश दे। Court ने यह बात ऐसे मामले की सुनवाई करते वक्त कहा जिस पति ने Court में गुहार लगाकर अपनी पत्नी को साथ रहने के की मांग की। 

   

कार्यवाही के दौरान सुप्रीम Court के जस्टिस संजय कृष्ण और हेमंत गुप्ता जी का कहना था।कि आपको क्या लगता है क्या एक महिला अपनी पति का गुलाम होती है।जो हम आपको ऐसे आदेश दे।  महिला आपकी संपत्ति नहीं है जिसे हम आपके कहने पर आपके साथ रहने को जबरदस्ती करें और जाने को कहे। 

इसी विवाद को देखते हुए 1 अप्रैल 2019 को आदेश दिया जो की गोरखपुर के Family Court ने हिंदू विवाह एक्ट के  9 के तहत पति के हक में दे दिया था।महिला का मानना था कि साल 2013 में शादी के बाद सही उसे दहेज के लिए जबरदस्ती किया जा रहा है। और उसके बाद 2015 में महिला ने गोरखपुर Court में अपना गुहार लगाया और मांग की कोर्ट ने पति को ₹20000 प्रत्येक महीना पत्नी को देने का फैसला सुनाया। जिसके साथ ही पति ने Court मे अधिकारों की बहाली के लिए अपनी याचिका दायर कर दिए। 

गोरखपुर के Family Court के आदेश सुनाने के बाद पति ने हाई कोर्ट के तरफ रुख़ किया और याचिका दायर गुजारा भत्ता दिए जाने पर सवाल उठने लगे कि जब वह अपनी पत्नी के साथ रहने को तैयार है।तो इसकी आवश्यकता  क्यों है इलाहाबाद High Court ने इस अपील को खारिज कर दिया। जिसके बाद उन्होंने Supreme Court की तरफ रुख करते हुए उनके दरबाजे पर पहुँच गए। 

 अपने बचाव करते हुए महिला ने कोर्ट में यह दलील दी कि उसके पति का पूरा खेल गुजारा भत्ता देने से बचने के लिए कर रहा है।महिला के वकील ने Court को यह भी सुनाया कि पति तभी Family Coat गया जब उसे पत्नी को गुजारा बता देने का आदेश मिल गया है। 

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